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तुपुदाना इंडस्ट्रियल एरिया : सिर्फ दो महीने में 50 कारखाने हुए बंद, चार हजार लोगों की गयी नौकरी

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Chhaya/ Sweta

Ranchi : आर्थिक मंदी के दौर ने धीरे-धीरे सभी उद्योगों को अपनी चपेट में ले लिया है. देशभर में इन दिनों उद्योग जगत में हाहाकार मचा हुआ है. मंदी के असर से बेरोजगारी दर भी लगातार बढ़ रही है. जहां बड़ी कंपनियां मंदी से परेशान हैं, वहीं लघु उद्योगों का हाल तो और भी बुरा है.

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रांची स्थित तुपुदाना इंडस्ट्रीयल एरिया की बात की जाये तो इस क्षेत्र में लगभग 150 छोटे कारखाने स्थापित हैं. जिनमें से 50 छोटे कारखाने पूरी से बंद हो गये हैं. कारखानों की ये स्थिति पिछले दो माह में हुई.

कारखाना संचालकों का कहना है कि सभी कारखानों में लगभग दस से पंद्रह लोग काम करते थे. लेकिन कारखानों में काम बंद होने से लगभग चार हजार के लोगों की नौकरी चली गयी.

इनमें से कुछ कारखानें ऐसे भी हैं, जिन्होंने कुछ कर्मचारियों को स्थायी नौकरी लोगों को दे रखी थी. लेकिन अब ये लघु उद्योग इस स्थिति में भी नहीं हैं कि स्थायी नौकरी वालों को भी वेतन दें.

कुछ कारखाना संचालकों का कहना है कि अगर आने वाले दो माह में सरकार ने कोई पहल नहीं की तो राज्य में लघु उद्योग पूरी तरह से खत्म हो जायेंगे.

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क्या-क्या बनते थे कारखानों में

इस क्षेत्र में फेब्रिकेशन, इंजीनियरिंग, माइनिंग, स्टील प्लांट सेमत अन्य स्पेयर पार्टस बनाये जाते थे. बंद होने वाले कारखानों की बात करें तो इनमें सबसे अधिक फेब्रिकेशन के कारखानें बंद हुए. जिसमें लौह अयस्क संबधी कार्य होते थे.

वहीं स्टील प्लांट भी बंद हुए हैं. महावीर रिफ्रेकटरीज के निदेशक सुरेंद्र सिंह ने जानकारी दी कि क्षेत्र में एचईसी, मेकॉन के लिए शॉवल स्पेयर पार्टस बनाये जाते थे. लेकिन पिछले दो माह से इन कारखानों में काम बंद है. खुद सुरेंद्र के पास लाखों का माल बनकर तैयार है, लेकिन अहम वक्त में एचईसी ने ऑर्डर कैंसिल कर दिया.

बंद के बाद क्या हो रहा कारखानों में

क्षेत्र में जाने से जानकारी हुई कि ये कारखानें पिछले दो माह से ठप्प पड़े हुए हैं. लौह अयस्क का काम करने वाली महावीर रिफ्रेकटरीज में दो तीन मजदूर लगे थे, जो कारखाना की सफाई कर रहे थे.

डिप्टी मैनेजर राज सिद्दकी ने जानकारी दी कि कारखाना में दस कर्मचारी स्थायी थे. लेकिन स्थिति को देखते हुए वे भी खेती करने चले गये. जब न्यूज विंग की संवाददाता ने इस कारखाना का दौरा किया तो जगह-जगह स्पंज डस्ट पड़े दिखें. भठ्ठियों में भी काम ठप्प पड़ा था.

मशीन ऑफ कास्टिंग स्मॉल फेब्रिकेशन के कारखाने में चार कामगार की काम करते दिखे. इसके संचालक शशिभूषण सिंह ने बताया कि दो माह पहले इनके यहां लगभग 25 लोग काम करते थे. जो अब नहीं हैं.

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ऑर्डर नहीं मिल रहा था

कारखाना संचालकों से जानकारी मिली की इन कंपनियों को कुछ महीनों से ऑर्डर ही नहीं मिल रहा था. राज्य में चलने वाले लघु उद्योग मदर कपंनियों पर निर्भर हैं. ये मदर कंपनियां मेकॉन, एचईसी, सीसीएल आदि है.

मशीन ऑफ फेब्रिकेशन के प्रकाश सिंह ने बताया कि पिछले तीन साल से एचईसी से किसी भी लघु उद्योग को कोई ऑर्डर नहीं दिया गया है.

वहीं लौह अयस्क का काम करने वाली लघु उद्योगों को काम नहीं मिलने का एक प्रमुख कारण रियल स्टेट में गिरावट आना है. साथ ही जानकारी दी गयी कि ग्रिल, छड़ आदि बनाने के लिए बड़ी- बड़ी कंपनियां लौह अयस्क लेती थीं, लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा.

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कच्चा माल मिलने में हो रही परेशानी

कच्चा माल आसानी से नहीं मिलना भी इन व्यापारियों की एक समस्या है. महावीर रिफ्रेकटरीज के निदेशक सुरेंद्र सिंह ने जानकारी दी कि उनके कारखाने में लोहे की गोलियां बनाने के लिए पेट्रोलियम कोक की जरूरत होती है. जो पानीपत में कम दाम में मिलते हैं. वहीं पानीपत से पेट्रोलियम कोक को राजधानी लाने में 2500 रूपये खर्च होते हैं.

विगत दिनों सुरेंद्र को आइओसीएल की ओर से पेट्रोलियम कोक पारादीप (ओडिशा) से लाने की बात की गयी. जबकि पारादीप से पेट्रोलियम कोक लाने के लिए वाहन खर्च दो हजार रूपये से अधिक लगता है. मतलब 27,00 रूपये.

सुरेंद्र ने कहा कि पारादीप (ओड़िशा) में ये भी नियम है कि वहां से खनिज लाया नहीं जा सकता, बल्कि वहीं इसका उपयोग करना है. जो संभव नहीं है.साथ ही उन्होंने बताया कि 5-6 करोड़ का उनका सलाना टर्नओवर था, जो पिछले वित्तीय वर्ष में घटकर 2 करोड़ हो गया है.

आयरन से बने उत्पाद का दाम कम हो गया

लघु उद्योग के संचालकों का कहना है कि बाजार में पहले की तरह अब लौह उत्पादों की मांग भी नहीं है. जिसके कारण कम दाम में उत्पाद बेचे जा रहे हैं. महावीर रिफ्रेकटरीज के राज ने जानकारी दी कि पहले उनके कारखाने के उत्पादों को वे 20,000 प्रति टन बेचते थे.

लेकिन पिछले दिनों उन्होंने 16,000 प्रति टन से अपने उत्पादों को बेचा. ऐसे में कंपनी को प्रति टन चार हजार रूपये का नुकसान उठाना पड़ा. राज ने बताया कि अधिक नुकसान होने के कारण अंत में कारखाना में निमार्ण कार्य बंद करना पड़ा.

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