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2017-18 में बेरोजगारी 45 सालों में सबसे अधिक, ज्यादा एडुकेटेड लोगों में ज्यादा अनइंप्लॉयमेंट

बेरोजगारी का आलम: पीजी कर डिलीवरी बॉय बने 25 हजार युवा, दूसरी तिमाही में केवल 13% कंपनियां हायरिंग के मूड में

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New Delhi: देश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के साथ-साथ बेरोजगारी की समस्या से निपटना केंद्र सरकार के लिए बड़ी चुनौती है.

सरकार ने बेरोजगारी से जुड़े उस आंकड़े को सही माना है, जिसमें पिछले 45 सालों में 2017-18 में बेरोजगारी सबसे ज्यादा होने की बात कही गयी है. साथ ही इस आंकड़ें में ये भी बताया गया है कि सबसे ज्यादा बेरोजगारी, ज्यादा शिक्षित वर्ग में है.

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निरक्षर लोगों में बेरोजगारी की दर 2.1

आंकड़ें के मुताबिक, 2017 में शहरी इलाकों में रहनेवाले निरक्षर लोगों के बीच बेरोजगारी की दर 2.1 फीसदी थी, जबकि सेकेंडरी या इससे अधिक शिक्षित वर्ग में यह दर बढ़कर 9.2 फीसदी हो गयी.

जनसत्ता की खबर के मुताबिक, टीमलीज की एक रिपोर्ट में ऑनलाइन कंपनियों के लिए डिलिवरी स्टाफ के तौर पर काम करने वाले पोस्ट ग्रैजुएट और ग्रैजुएट युवाओं की संख्या 25 हजार के करीब बतायी गयी है.

हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत जनादेश के साथ बीजेपी की सत्ता में वापसी से राजनीतिक स्थायित्व आयेगा, जो रोजगार के नये-नये साधन पैदा करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है.

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लेकिन, इतनी जल्दी आंकड़ों में बदलाव की उम्मीद नहीं की जा सकती. कंपनियों की ओर से नये लोगों को हायर की संभावनाएं फिलहाल बेहद कम हैं.

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दूसरी तिमाही में 13% कंपनियां ही लोगों को हायर करने के मूड में

मैनपावर इंप्लॉयमेंट आउटलुक सर्वे के एक आंकड़े के मुताबिक, देश की सिर्फ 13 प्रतिशत कंपनियां ही जुलाई से लेकर सितंबर वाली दूसरी तिमाही में और ज्यादा लोग हायर करने के मूड में नजर आ रही हैं.

हालांकि, पिछले साल इसी तिमाही में यह आंकड़ा 16 फीसदी का था. बता दें कि इस सर्वे में विभिन्न इंडस्ट्रीज की कुल 4,951 कंपनियों को शामिल किया गया. सर्वे के आंकड़ों के मुताबिक, 61 प्रतिशत नौकरी देनेवाली कंपनियां अपने यहां नई जॉब्स की गुंजाइश नहीं देख रहे.

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