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टीबी के खात्मे के लिए सहयोग को तैयार हैं हम, फंड की नहीं है कमी: डॉ कुलकर्णी

टीबी उन्मूलन में उद्योगों के साथ खनन कंपनियों की हो सकती है महत्वपूर्ण भूमिका

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Ranchi: स्वास्थ्य सचिव डॉ नितिन मदन कुलकर्णी ने कहा कि आज आप मशीनों को बहुत आसानी से प्राप्त कर लेंगे, लेकिन प्रशिक्षित कर्मचारी बहुत आसानी से नहीं मिलते. यदि किसी कर्मचारी को टीबी हो जाता है, तो उसके काम में बाधा आयेगी. इसलिए हमें टीबी पर उद्योगों की भूमिका को ठीक से समझाना होगा. उद्योगों के साथ टीबी के लिए किसी भी तरह के सहयोग के लिए तैयार हैं और फंड की कोई कमी नहीं है. डॉ कुलकर्णी गुरुवार को संस्था रीच द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय परामर्श बैठक में बोल रहे थे. बैठक में यह बात सामने आयी कि झारखंड में उद्योगों के साथ खनन कंपनियां टीबी उन्मूलन में अहम भूमिका निभा सकती हैं.

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हितधारकों को संवेदनशील बनना होगा

बैठक का उद्देश्य टीबी की रोकथाम के लिए नियोक्ता आधारित मॉडल (ईएलएम) पर विभिन्न हितधारकों को संवेदनशील बनाना था. ईएलएम के तहत, भावी नियोक्ता मौजूदा प्रणालियों, संरचनाओं और संसाधनों के भीतर जागरुकता, स्वास्थ्य, शिक्षा और सेवा वितरण को एकीकृत कर टीबी नियंत्रण पर एक व्यापक कार्यक्रम लागू करेंगे. राज्य यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ राकेश दयाल ने कहा, स्वास्थ्य विभाग अकेले टीबी से नहीं लड़ सकता है. प्रत्येक हितधारक को अपनी भूमिका निभानी होगी. देश की राष्ट्रीय सामरिक योजना 2017-2025 के अनुसार टीबी के लिए खनिकों और औद्योगिक श्रमिकों को कमजोर आबादी माना जाता है.

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मामला संवेदनशील और गंभीरः खान सचिव

खान सचिव अबुबकर सिद्दिख ने कहा कि यह मुद्दा बहुत संवेदनशील और गंभीर है. खनन क्षेत्रों में सामान्य क्षेत्रों की तुलना में 10 गुना अधिक मामले हैं. कॉपोर्रेट सोशल रेसपोंसिबिलिटी टीबी और पोषण संबंधी मामलों पर ध्यान केंद्रित कर टीबी को खत्म करने में एक प्रमुख भूमिका निभा सकता है. बैठक में खनन कंपनियों के सात उद्योगों के प्रतिनिधि मौजूद थे. बैठक का आयोजन स्टेट टीबी सेल, झारखंड के सहयोग से किया गया था.

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उद्योगों में काम करनेवाले होते हैं तपेदिक के शिकार: पंकज

संस्था रीच के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ पंकज ढ़ींगरा ने कहा उद्योगों में काम करने वाले लोग तपेदिक के शिकार होते हैं. टीबी का तभी ठीक से पता चल सकता है जब जिला व राज्य टीबी सेल और उद्योग विभाग मिलकर कार्यस्थल से टीबी को खत्म करने के लिए सहयोग करे. रीच की प्रोजेक्ट डायरेक्टर स्मृति कुमारी ने कहा कि जब मैं कोयला क्षेत्र के कुछ हितधारकों के साथ बातचीत कर रही थी, तो यह जान कर हैरानी हुई कि 30 प्रतिशत कर्मचारी टीबी से प्रभावित हैं. सभी के सहयोग से ही इस बीमारी को खत्म किया जा सकता है. कार्यक्रम का संचालन रीच के दिवाकर शर्मा ने किया.

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