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‘आंदोलन के लिए पांच-दस रुपये साप्ताहिक करते हैं जमा, बार-बार #Ranchi आना मुश्किल’

बंद हो चुकी पलामू सोकरा ग्रेफाइट माइंस के 455 मजदूर कर रहे आंदोलन, मोरहाबादी में मच्छरों के बीच बिताते हैं रात, 2014 में एक करोड़ 27 लाख आवंटित, लेकिन अब तक इन्हें भुगतान नहीं किया गया.

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Ranchi : 27 सालों तक डीसी, श्रमायुक्त और कोर्ट का चक्कर काट चुके पलामू सोकरा ग्रेफाइट माइंस के मजदूर अब मोरहाबादी में अपना आशियाना बना चुके हैं. पलामू सोकरा ग्रेफाइट माइंस के मजदूर अपने बकाया भुगतान की मांग पिछले 27 सालों से कर रहे हैं. इनकी संख्या 455 है.

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मजदूरों ने बताया कि साल 1982 में इन्हें बिना किसी सूचना के काम से निकाल दिया गया. सुप्रीम कोर्ट साल 1992 में ही राज्य सरकार को इनका बकाया भुगतान करने का आदेश दे चुका है. साल 2014 में इनके लिये एक करोड़ 27 लाख आवंटित भी किया गया. लेकिन अब तक मजदूरों को इनका हक नहीं मिला.

फिलहाल लंबे समय से ये मजदूर मोरहाबादी के पास अपना आशियाना बनाये हुए हैं. दिन भर राजभवन के पास आंदोलन करने के बाद ये रात यहीं गुजार रहे हैं. इनके साथ महिलाएं भी हैं जो किसी तरह यहां रह रही है. सोकरा ग्रेफाइट माइंस पलामू के चैनपुर प्रखंड में है.

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पांच दस रुपये मजदूरी करके जमा करते है सभी

मजदूरों ने कहा कि काफी परेशानी से ये अपने आंदोलन को अंजाम दे रहे है. परमदेव सिंह ने बताया कि आंदोलन को 27 साल हो चुके हैं. कुछ मजदूर अब हैं भी नहीं. लेकिन उनके बच्चे और पोते अपने अधिकार की मांग कर रहे हैं. मजदूरी करने ये हरियाणा भी जाते हैं.

ऐसे में जब जब पलामू से रांची आना होता है तो काम छूट जाता है. एक दिन की मजदूरी काफी मायने रखती है.

परमदेव ने बताया कि सभी मजदूर सालों भर पांच दस रूपये प्रति सप्ताह जाम करके अपनी आवाज उठा रहे हैं. लेकिन कोई सुनने वाला नहीं. इन्होंने कहा कि इतने दिन से यहां हैं लेकिन कोई देखने नहीं आता.

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मच्छरों के बीच सोते हैं, नाली का पानी बहता है

इसी क्षेत्र से आयी सुनरबसिया देवी ने कहा कि पांच सिंतबर से यहां बैठे हैं. रात में मैदान के पास जाते हैं सोने. बहुत परेशानी है. जिस शेड के नीचे सोते हैं वहीं बगल से नाली है. बदबू तो है ही, बारिश होने से पानी भी बाहर निकल आता है. रात भर मच्छरों के बीच सोना पड़ता है.

कुछ ने बताया कि क्षेत्र में सोकरा ग्रेफाइट माइंस के कारण लोगों को काम मिलता था. लेकिन एक दिन अचानक मजदूरों को काम से हटा दिया गया. बाद में कुछ दिन काम चला और फिर बंद कर दिया गया.

ऐसे में लेागों को हरियाणा, पंजाब जैसे राज्य काम करने जाना पड़ता है. वहां से पैसे जुटा कर यहां आंदोलन करते हैं ताकि यहां माइंस चालू हो और काम मिले. बकाया भुगतान भी हो जाये.

सुदेश्वर सिंह ने कहा कि जब से मजदूर यहां आंदोलन कर रहे हैं तब से पलामू में विधायक ने काम में तेजी लायी है. जानकारी मिली है कि टीम गयी हुई है जो सोकरा ग्रेफाइट क्षेत्र की जांच कर रही है. इन 455 मजदूरों की मांग है कि इनका बकाया भुगतान किया जायें. साथ ही सोकरा ग्रेफाइट माइंस क्षेत्र में काम शुरू किया जाये.

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