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पश्चिमी सिंहभूम : लाभुकों की शिकायत, ‘2016 में तीन महीने, 2017 में एक और 2018 में चार महीनों का राशन नहीं मिला’

राशन कार्डधारियों का सरकार से सवाल- कहां गया गरीबों का अनाज, बताये सरकार

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Chaibasa : राज्य में खाद्य सुरक्षा कानून लागू होने के बाद भी ग्रामीण अंचलों में सरकारी राशन लाभुकों को सही ढंग से नही मिल रहा है. पश्चिम सिंहभूम के जिला मुख्यालय चाईबासा में राशन के सवाल पर उपायुक्त कार्यालय के समक्ष प्रर्दशन में सरकार के विरोध आक्रोश देखा गया.

राज्य में खाद्य सुरक्षा कानून लागू है. कानून के तहत शिकायतों का एक महीने में निवारण किया जाना है. धरने में उपस्थित अनेक कार्डधारियों ने कहा कि पिछले एक साल में लगातार शिकायत करने के बावज़ूद भी उनकी समस्याओं का निवारण नहीं हुआ है.

कुपुई के ग्रामीणों के कहा कि प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी और डीलर ने उनके नाम पर उनका हस्ताक्षर व अंगूठे के निशानों को फर्ज़ी तरीके से लगाकर रिपोर्ट बना दिया है कि उन्हें सितम्बर 2018 का राशन मिल गया है. इस सम्बंध में अवाज उठाने पर राशन कार्डों को रद्द करने की घमकी दी जाती है.

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दो साल में कई महीने का राशन खा गये

धरने में चक्रधरपुर प्रखंड के बाईपी गांव के जॉन कायम ने कहा, ”हमारे गांव के किसी भी कार्डधारी को सितम्बर-दिसम्बर 2018 का राशन नहीं मिला है. हमने कई बार आपूर्ति पदाधिकारी, ज़िला शिकायत निवारण पदाधिकारी, उपायुक्त व राज्य खाद्य आयोग को भी शिकायत की है.

पास के गांव कुपुई के केलाराम माझी ने कहा, ”हम लोगों को भी उन महीनों का राशन नहीं मिला है. एवं हमारे गांव के 81 कार्डधारियों ने तय किया है कि जब तक पिछला बकाया राशन नहीं मिल जायेगा, वे अन्य महीनों का राशन नहीं लेंगे. आखिर गरीबों का राशन कौन खा रहा है बताये बहुमत वाली सरकार.”

अन्य कई गावों (जैसे खुंटपानी प्रखंड का उलिराजबसा, बड़ा बंकुआ, ओंकोलकुटी व सोनुआ का पोड़ाहाट) के लोगों ने भी कहा कि उन्हें भी कई महीनों का राशन नहीं मिला है. खूंटपानी प्रखंड के उलिराजाबसा के लोगों ने कहा कि उन्हें 2016 में तीन महीने, 2017 में एक और 2018 में चार महीनों का राशन नहीं मिला. गांव के बुज़ुर्ग सुनिया जोजो ने बोला, ”उनको शर्म नहीं आता है गरीबों का राशन खाने में.”

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बिरेन दिग्गी को नही मिला था चार माह का राशन

सोनुआ के पोड़ाहाट गांव की बिरेन दिग्गी की दिसम्बर 2018 में मौत हो गयी थी. उन्हें चार महीनों का राशन नहीं मिला था. उसी गांव से आयी कौशल्या दिग्गी ने कहा कि कई बार शिकायत करने के बावज़ूद गांव के किसी को आज तक सितम्बर-दिसम्बर 2018 का राशन नहीं मिला है.

चाईबासा सदर के प्रखंड के लुपुंगगुटु गांव के कार्डधारियों ने बताया कि डीलर द्वारा पॉश मशीन में उनका आधार-आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण करवा दिया जाता है लेकिन राशन नहीं दिया जाता.

जब से जन वितरण प्रणाली में आधार अनिवार्य किया गया है, तब से कार्डधारियों को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. कई योग्य परिवारों का राशनकार्ड रद्द कर दिया गया है. एक भी डीलर द्वारा अपवाद पंजी का संधारण नहीं किया जाता है जिससे वैसे कार्डधारियों को राशन दिया जाना है जिनका पॉश मशीन में ऊंगली के निशान काम न करे.

धरने के अंत में प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त के ओएसडी से मिलकर राशन गबन की शिकायत की और मांग पत्र सौंपा. कार्यक्रम के अंत में ज़िला शिकायत निवारण पदाधिकारी और ज़िला आपूर्ति पदाधिकारी का पुतला दहन किया गया.

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क्या है पीडीएस लाभुकों की मांग

  • सभी गावों में 2016, 2017 व 2018 का बकाया खाद्यान्न तुरंत कार्डधारियों को वितरण किया जाय.
  • सभी योग्य परिवार जिनका राशन कार्ड रद्द किया गया, उन्हें तुरंत नया कार्ड निर्गत किया जाय.
  • राशन चोरी के लिए ज़िम्मेवार राशन डीलरों का लाइसेंस तुरंत रद्द किया जाय एवं सभी ज़िम्मेवार पदाधिकारियों पर उचित दंडात्मक कार्यवाई की जाय.
  • जन वितरण प्रणाली से आधार-आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण व्यवस्था (पॉस मशीन) हटाई जाय.

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