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क्या है पत्थलगड़ी का गुजरात-राजस्थान कनेक्शन, समर्थक अभिवादन में ‘जोहार’ की जगह कहते हैं ‘पितु की जय’

राज्य सरकार राजनीतिक फायदे के लिए मिशनरियों का नाम पत्थलगड़ी में घसीट रही हैं-सधनु भगत

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Jamshedpur: झारखंड के मुंडा अंचल में आदिवासियों को वोट न देने, सरकारी योजना को छोड़ने की बात कहने वाला ‘ए.सी भारत सरकार कुटुंब परिवार’ संगठन गुजरात से जुड़ा है. गौरतलब है कि ये संगठन खुद को भारत सरकार कहता है और ये पूरा संगठन गुजरात से जुड़ा हुआ है.

प्राप्त सूचना के अनुसार, भारतीय ट्राइबल पार्टी, ‘ए०सी० भारत सरकार कुटुंब परिवार’ और विवादित पत्थलगड़ी के बीच गहरा संबंध कहा जा रहा है. जिसका संबंध राजस्थान और गुजरात से जुड़ा है.

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इस संगठन के समर्थक झारखंड में भी किसी के अभिवादन में ‘जोहार’ की जगह ‘पितु की जय’ कहने लगे हैं. खूंटी जिला के मुंडा समुह के द्वारा जल,जंगल,जमीन को बचाने के लिए कई आंदोलन किये गये.

झारखंड बनने के बाद भी कोयलकारो की लड़ाई जारी रही. वहीं मितल कंपनी और सीएनटी एक्ट में रघुवर सरकार की ओर से किये गये संशोधन के विरोध में भी जोरदार आंदोलन खूंटी में हुए. जिसके बाद सरकार ने संशोधन वापस ले लिया. उस दैरान इस संगठन के लोग आंदोलन में नजर नहीं आये.

क्या कहते हैं ए०सी० भारत सरकार कुटुंब परिवार के बारे में जानकार

जब खूंटी में 2014 के बाद ग्रामसभा के अधिकार के लिए,पेसा कानून लागू करने की मांग एवं लैंड बैंक और सीएनटी-एसपीटी एक्ट के संशोधन के विरोध हुए अंदोलन में ए०सी० भारत सरकार कुटुंब परिवार कहीं नजर नहीं आया. सीएनटी संशोधन के विरोध में खूंटी में हुए आंदोलन में एक-दो गांवों में पत्थलगड़ी की गई थी.

राजस्थान में कुंवर केसरी के समर्थक

जिसमें विवादित पत्थलगड़ी की बात नहीं लिखी गयी थी. जानकार कहते हैं कि इसी का लाभ उठा कर गुजरात से जुड़े संगठन ने झारखंड में पत्थलगड़ी के नाम पर प्रशासन और आदिवासी समाज के बीच टकराव की स्थिति पैदा करा दी. संगठन ने मुंडा समाज में विरोध के स्वर को अलगावाद में बदल देने का काम किया.

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जिसे राजनीतिक लाभ के लिए ईसाई मिशनरियों की सजिश बताकर प्रचारित किया गया. जानकार कहते हैं कि खूंटी में पत्थलगड़ी शुरू होने के कुछ दिनों पहले ही झारखंड से कुछ लोग गुजरात गये और प्रशिक्षत होकर लौटे. जिसमें बेलस बबिता, यूसुफ पूर्ति, विजय कुजूर जैसे पत्थलगड़ी के स्वंयभू नेता शामिल हुए थे.

बेलस बबिता,यूसुफ पूर्ति, विजय कुजूर ने गुजरात जाकर लिया था प्रशिक्षण

सफेद कपड़े में बिरसाईत के अलावा भी खूंटी में कुछ लोग नजर आने लगे हैं. इन लोगों को कुंवर केसरी सिंह के संगठन व भारतीय ट्राइबल पार्टी जुड़ा हुआ बताया जा रहा है. संगठन और पार्टी में शामिल कुछ नेताओं का कहना है कि उन्होंने ये सिद्धांत गुजरात के सती-पति आश्रम में पढ़ा है.

यह आश्रम कुंवर केसरी सिंह नाम के व्यक्ति ने शुरू किया था. वर्तमान में उनका बेटा रविन्द्र कुवंर इस संगठन को चला रहा है. संगठन खुद को भारत का मालिक बताता है. और इनके समर्थक खुद को ए.सी भारत सरकार कहते हैं. संगठन के द्वारा चुनाव में भागीदारी न करने और आदिवासियों को वोट बहिष्कार करने की बात कहते हैं.

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राशन कार्ड और आधार कार्ड को खत्म करने के लिए आदिवासियों को प्रेरित करते हैं. लेकिन दूसरी ओर भारतीय ट्राइबल पार्टी का सर्मथन भी करते हैं.

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कौन है ए.सी कुंवर केसरी सिंह

ए.सी कुंवर केसरी सिंह का जन्म गुजरात के एक गांव कटास्वान, तहेसिल: व्यारा, जिला: सूरत (जिसे विभाजीत करके आज तापी नाम दिया है) में हुआ. उनके पिता का नाम टेटिया कानजी गामित था. पढाई खत्म करने बाद वह बेरिस्टर बने.

इन्होंने भारत देश को “अखिल आदिवासी एक्सक्लूडेड पार्शियल एरिया” कहा. यानी आदिवासियों का देश जिसमे कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकता. संगठन के द्वारा गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र में भी गतिविधि चलायी जा रही है और भारतीय ट्राइबल पार्टी इसी संगठन से जुड़ी बतायी जा रही है.

जानकार कहते हैं, खूंटी जिला में संगठन की गतिविधियों के कारण 5000 से अधिक वोटर कार्ड, राशन कार्ड, आधार कार्ड राजभवन भेजे जाने की सूचना है. हालांकि अपना नाम न लिखने की शर्त पर संगठन के बारे में जानकारी दी.

उन्होंने बताया कि खूंटी जिला के मुरहू में तीन दिन विश्व शंति के नाम पर सम्मेलन किया गया. सम्मेलन 14 से 16 अक्टूबर 2019 को मुरहू प्रखंड के गुंटीगड़ा जंगल हुआ था. जिसमें आधार कार्ड, वोट और चुनाव से दूर रहने की सीख दी गयी.

साथ ही संगठन के लोग मुंडाओं को अपने इशारों पर चलने के लिए प्रेरित कर रहे थे. इस सम्मेलन में करीब 3000 से अधिक लोगों ने भागीदारी की थी. कार्यक्रम में वक्ता राजस्थान और गुजरात से आये थे. साथ ही कार्यक्रम के दौरान तस्वीर खींचने पर पाबंदी थी.

पत्थलगड़ी के नाम पर इलाके में हुए कई मुकदमे

आजाद भारत के इतिहास में खूंटी शायद पहला जिला है, जहां थोक भाव में देशद्राह के मामले दर्ज किये गये हैं. ग्रामसभा के अधिकार, पेसा कानून,लैंड बैक और सीएनटी-एसपीटी एक्ट के संशोधन के विरोध में जिले में 2017-18 के बीच 23 प्राथमिकियां पत्थलगड़ी दर्ज की गयी.

जिसमें करीब 250 लोगों को प्राथमिकी एवं उपलब्ध 14 एफआइआर में 14,000 अज्ञात लोगों पर पत्थलगड़ी को लेकर देशद्रोह के साथ के साथ-साथ आर्मस एक्ट एवं धारा-147, 148, 149, 341, 342, 323, 324, 325, 307, 109, 114, 124-A, 153-A, 153-E, 295-A, 186, 353, 290, 120E, 302 जैसे मामलों में आरोपपित भी किया गया है.

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जब भारतीय ट्राइबल पार्टी के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व विधायक लोहरदगा (भाजपा) सधनु भगत से ए०सी० भारत सरकार कुटुंब परिवार, भारतीय ट्राइबल पार्टी, साल 2017-18 में खूंटी में हुए पत्थलगड़ी से गुजरात और राजस्थान कनेक्शन में बारे में पूछा गया तो उन्होंने न्यूजविंग को कहा, इस पर अभी नही पूछिए.

जब आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों का पालन नहीं हो रहा है. ऐसे में आधार और राशन कार्ड आदिवासी रख कर क्या करेंगे. पत्थलगड़ी से मिशनरियों का क्या सम्बंध है, इस पर उन्होंने कहा सरकार जानबूझ कर पत्थलगड़ी में मिशनरियों का नाम घसीट रही है.

राजस्थान में आयोजित आदिवासी दिवस पर राष्ट्रपति,सीजेआइ, राज्यपाल को लिखा गया पत्र

9 अगस्त वर्ष 2018 को राजस्थान के डुगरपुरा में आदिवासी सम्मेलन हुआ. जिसमें भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा, विद्यार्थी मोर्चा, भारतीय ट्राइबल पार्टी, ए०सी० भारत सरकार कुटुंब परिवार के समर्थको ने रामप्रसाद डिंडोरके हस्ताक्षर से एक पत्र राष्ट्रपति, मुख्य न्यायाधीश, राज्यपाल सहित प्रमुख अधिकारियों को भेजा.

पत्र में 28 बिंदुओं को शामिल किया गया था. जिसमें किसी भी प्रमाण पत्र में धर्म लिखने को असंवैधानिक बताया जाये. आदिवासी क्षेत्र में खनन को असंवैधानिक घोषित किया जाए. आधार कार्ड, वोटर कार्ड, राशन कार्ड असंवैधानिक है और आदिवासी विरोधी दस्तावेज हैं. इन्हें बंद करें.

ग्राम सभा या गमेती की अनुमति के बिना गांव में पुलिस या कोई भी कार्रवाई नहीं करने की बात लिखी गयी थी. साथ ही इस पत्र के माध्यम से 15 अगस्त और 26 जनवरी में आदिवासियों के शामिल नहीं होने की घोषणा की बात भी लिखी गई थी.

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