न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

दर्द-ए-पारा शिक्षक: पत्नी की सिलाई से चलता है घर, पैसों के अभाव में बेटा कई परीक्षाओं से हुआ वंचित

मानदेय नहीं मिलने के कारण इनके बेटे की दो-दो परीक्षाएं छूटी

2,754

Ranchi : एक बेटा है. बेहतर शिक्षा देने की चाहत है. लेकिन स्थिति ऐसी है कि बच्चे को किसी तरह  पढ़ा तो लिये, लेकिन अब उसे परीक्षा दिलवाने तक के पैसे नहीं हैं. खराब लगता है, कई बार बेटे की परीक्षाएं भी छुटी हैं. कुछ परीक्षाएं तो निकल भी जाती हैं, लेकिन मुख्य परीक्षा में बेटे को नहीं भेज पाये, जिसका अफसोस हमेशा रहता है. ये कहना है बुढ़ाकोचा के पारा शिक्षक देवनारायण साहू का. जो राज्यकीयकृत उत्क्रमित मध्य विद्यालय बूढ़ाकोचा में कार्यरत हैं. लगभग सात किलोमीटर की दूरी हर दिन तय करके ये स्कूल जाते हैं और पढ़ाते हैं.

अपने बारे में बताते हुए इन्होंने कहा कि साल 2010 से पारा शिक्षक की नौकरी कर रहे हैं. घर में पत्नी, एक बेटा, और बहन है. सबकी जिम्मेवारी देवनारायण पर है. इन्होंने बताया कि इनके बेटे ने रेलवे की पीटी परीक्षा पास कर ली थी, मेंस परीक्षा फरवरी में हुई. लेकिन तब मानदेय नहीं मिला था और बेटे को परीक्षा देने के लिए आंध्रप्रदेश भेजना था, मगर पैसों के अभाव में नहीं भेज पाये. साथ ही उन्होंने बताया कि एक परीक्षा दार्जिलिंग में भी थी, लेकिन पौसों केल अभाव में बेटा को वहां भी नहीं भेज पाए.

JMM

इसे भी पढ़ें – दर्द-ए-पारा शिक्षक: कर्ज बढ़ा तो पत्नी ने कौशल विकास के तहत कर ली नौकरी, मगर उस काम से  महुआ चुनना…

बेटे की किताब तक नहीं ले पाते

अपनी स्थिति पर फीकी मुस्कान देते हुए देवनारायण ने कहा कि अब और क्या स्थिति बताएं. यहां तो घर बहुत मुश्किल से चल रहा है. हर चीज में इच्छाएं मारनी पड़ रही हैं. परीक्षा तो दूर बेटे को किताब तक ले कर नहीं दे पाते. प्रतियोगिताओं की किताबें काफी महंगी होती हैं. वहीं कई बार पैटर्न भी बदल दिये जाते हैं. ऐसे में बेटा किताब लेने की मांग करता है. लेकिन समय पर वो भी नहीं ले सकते. क्योंकि इन किताबों की कीमत 300-400 से लेकर हजारों तक रहती है. ऐसे में कैसे घर चलायें और पढ़ाएं.

किस परिस्थिति में घर चलाते हैं, वो भी बताना मुश्किल है. राशन कार्ड से अनाज तो मिल जाता है, लेकिन उससे क्या होगा. उपरी खर्च भी तो है. जोन्हा थोड़ा जंगली इलाका है, इसलिए जंगल से लकड़ी लाकर जलाते हैं. इन्होंने खीझते हुए कहा कि मानदेय मिले समय पर तब तो गैस सिलेंडर भरवायें.

इसे भी पढ़ें – दर्द-ए-पारा शिक्षक: बूढ़ी मां घर चलाने के लिए चुनती है इमली और लाह, दूध और सब्जियां तो सपने जैसा

पत्नी करती है कपड़ा सिलाई, इसी से चलता है उपरी खर्च

Related Posts

घर के उपरी खर्च के बारे में बताते हुए इन्होंने कहा कि राशन तो उधार में चल रहा है. वहीं उधार की वजह से कई बार बातें भी सुननी पड़ती हैं. क्योंकि उधार कभी भी एक बार में नहीं दे पाते. पत्नी थोड़ा बहुत सिलाई का काम करती है. इससे 100-200 की कमाई होती है. जिससे सब्जियां और छोटे-मोटे खर्च चलते हैं.

वहीं बातचीत के दौरान इनकी पत्नी ने बताया कि सिलाई से थोड़ा बहुत खर्च निकल जाता है. क्योंकि अगर सिलाई नहीं करते तो सब्जी तक नहीं ले पाते. साथ ही देवनारायण की पत्नी ने बताया कि  गांव में लोग कपड़े सिलाई के लिए ज्यादा पैसे भी नहीं देते. इसलिये कमाई अधिक नहीं है. उधार भी ज्यादा हो गया है, जिससे दुकानदार भी कई बातें सुना देते हैं. बहुत मुश्किल से घर चल रहा है.

अप्रैल माह के मानदेय के बारे में इन्होंने बताया कि सरकार ने मानदेय तो दे दिया, लेकिन काफी सोच समझकर खर्च करना पड़ता है. पहले तो उधार कर्ज में ही पैसे चल जाते हैं. वहीं फिर मानदेय कब मिलेगा, इसका कोई तय नहीं रहता. ऐसे में इच्छाएं मारकर घर चलाना पड़ता है.

इसे भी पढ़ें – दर्द-ए-पारा शिक्षक: उधार बढ़ने लगा तो बेटों ने पढ़ाई छोड़कर शुरू की मजदूरी, खुद भी सब्जियां बेच…

स्थायीकरण करें न करें लेकिन सम्मानजनक मानदेय दें

बातचीत के दौरान इन्होंने बताया कि जोन्हा से इनका स्कूल सात किलोमीटर की दूरी पर है. फरवरी से मानदेय रोक दिया गया है. आने-जाने के लिए भी पैसे की जरूरत होती है. पिछले दिनों तो स्कूल प्राचार्य से ही पैसे लेकर स्कूल आना-जाना किया. सरकार की बात करते हुए इन्होंने कहा कि सरकार से अपेक्षाएं बहुत अधिक हैं.

पारा शिक्षक सुदूर गांवों में पढ़ाते हैं. लेकिन मानदेय भी कम है और स्कूल आने-जाने में भी पैसे खर्च होते हैं. देवनारायण ने कहा कि सरकार से स्थायीकरण करें या न करें. कम से कम पारा शिक्षकों को सम्मानजनक जिदंगी तो दें. मानदेय इतना कम है कि उधार कर्ज में चला जा रहा है. सरकार कम से कम सम्मानजनक मानदेय तो दे. ताकि पारा शिक्षक सम्मानजनक जीवन जी सकें.

इसे भी पढ़ें – दर्द-ए-पारा शिक्षक: उम्र का गोल्डेन टाइम इस नौकरी में लगा दिया, अब कर्ज में डूबे हैं

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like