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क्या रघुवर दास अब भी कहेंगे 14 सालों में कुछ नहीं हुआ

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Faisal Anurag

झारखंड अव्वल. यहां के लोगों का जीवन स्तर सुधरा. संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के हवाले से यह खबर मीडिया में है. 27 करोड़ लोगों की गरीबी दूर हुई. गरीबी दूर करने में झारखंड अव्वल.

पर, हर छोटे-बड़े मामलों में ट्विट-रीट्विट करने वाली भाजपा और झारखंड के मुख्यमंत्री का बयान मिसिंग है. पहले समझ में नहीं आय़ा. ऐसा क्यों हो रहा है.

क्या यह झारखंड के लिये खुशी की बात नहीं हैं. झारखंडी मन-मिजाज की बात करने वालों को इस रिपोर्ट से खुशी नहीं मिली.
खबर को पढ़ने के बाद समझ में आया, क्यों सरकार खामोश है.

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क्योंकि यह रिपोर्ट 2006 से 2016 के बीच की है. रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान 27 करोड़ लोगों की गरीबी दूर हुई. कहने की जरुरत नहीं कि इस दौरान केंद्र में भी मनमोहन सिंह की सरकार थी, जिसके बारे में भाजपा कहती रही है कि सरकार में सिस्टम पैरालाईज्ड था.

कल्पना करिये, अगर यह रिपोर्ट 2014-19 के बीच की होती. तब क्या होता. शहर में पोस्टर-बैनर लग गये होते. डबल इंजन सरकार का कमाल नजर आता.

संभव है, अखबारों में बड़े-बड़े विज्ञापन भी नजर आते. लेकिन इस बार सरकार खामोश है. रिपोर्ट को लेकर सरकार का ट्विटर, फेसबुक, आइपीआरडी सब खामोश. जैसे कुछ हुआ ही नहीं.

इस खामोशी को समझना, उतना भी मुश्किल काम नहीं है. रघुवर दास जिस दिन से झारखंड के मुख्यमंत्री बने हैं. तब से अब तक अनगिनत बार कह चुके हैं. कुछ नहीं हुआ.

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14 साल में सरकारों ने कुछ भी नहीं किया. हमारी सरकार असली विकास कर रही है. इस तरह वह लगातार झारखंड के पूर्व सरकारों को कोसते रहे हैं.

उन्होंने कभी इस बात की परवाह नहीं की झारखंड में सबसे अधिक समय तक भाजपा ही सत्ता में रही है और खुद रघुवर दास भी मंत्रीमंडल का हिस्सा रहे हैं.

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पर, अब रिपोर्ट के रुप में सच सामने हैं. 2006 से 2016 के बीच झारखंड में विभिन्न स्तरों पर गरीबी 2005-06 में 74.9 प्रतिशत से कम होकर 2015-16 में 46.5 प्रतिशत पर आ गयी.

राज्य में पोषण, स्वच्छता, बच्चों की स्कूली शिक्षा, बिजली, स्कूल में बच्चों की उपस्थिति, आवास, खाना पकाने का ईंधन और संपत्ति जैसे मामलों में सुधार हुआ. वह भी तब, जब झारखंड में लगातार गठबंधन की सरकार रही और दो बार राष्ट्रपति शाषण लगा.

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