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गर्मी में बिजली के लिये मचेगा हाहाकार, सेंट्रल और निजी कंपनियों के रहमोकरम पर झारखंड की बिजली

तीन दिन से टीवीएनएल की दोनों यूनिटें ठप, मार्च में 22 दिन टीवीएनएल की सिर्फ एक यूनिट हुआ उत्पादन

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Ranchi : झारखंड को पावर हब बनाने, 24 घंटे बिजली देने का दावा पिछले चार साल में अनेकों बार किया जा चुका. कभी 2017 से 24 घंटे बिजली, तो कभी 2018 से 24 घंटे बिजली तो कभी 2019 से 24 घंटे बिजली. सरकार के ये सभी दावे फेल होते नजर आ रहे हैं.

हर दिन प्रदेश में औसतन तीन से चार घंटे बिजली की कटौती की जा रही है. बिजली व्यवस्था पूरी तरह से सेंट्रल एलोकेशन और निजी कंपनियों पर टिकी हुई हैं. सेंट्रल और निजी कंपनियों से औसतन 750-900 मेगावाट तक बिजली ली जा रही है.

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वित्तीय संकट से गुजर रहा टीवीएनएल

राज्य का एक मात्र पावर प्लांट टीवीएनएल वित्तीय संकट से गुजर रहा है. इसका भी सरकार सही तरीके से संचालन नहीं कर पा रही है. एक मार्च से 29 मार्च के बीच तीन दिन टीवीएनएल की दोनों यूनिटों से उत्पादन ठप रहा.

पिछले 22 दिनों में टीवीएनएल की एक यूनिट से उत्पादन ठप है. प्रदेश की बिजली व्यवस्था सेंट्रल एलोकेशन और निजी कंपनियों के रहमोकरम पर टिकी हुई है.

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हर दिन 350 से 150 मेगावाट तक की कमी

मार्च में हर दिन 350 से 150 मेगावाट तक बिजली की कमी रही. हर दिन औसतन 1100 मेगावाट (डीवीसी कमांड एरिया के सात जिलों को छोड़कर) बिजली की जरूरत है. लेकिन दो मार्च, पांच मार्च और 19 मार्च को छोड़कर किसी भी दिन प्रदेश में बिजली की मांग पूरी नहीं हो पायी.

दो मार्च को 1147 मेगावाट, पांच मार्च को 1205 मेगावाट और 19 मार्च को 1175 मेगावाट बिजली उपलब्ध थी. इसके बाद किसी भी दिन बिजली की मांग पूरी नहीं हो पायी.

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किस दिन कितने मेगावाट बिजली उपलब्ध रही

एक मार्च – 1008

 दो मार्च -1147

 तीन मार्च – 899

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 चार मार्च- 1087

पांच मार्च – 1205

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छह मार्च – 936

सात मार्च – 879

आठ मार्च – 907

नौ मार्च – 826

11 मार्च – 903

12 मार्च – 882

14 मार्च – 823

15 मार्च – 670

6 मार्च – 793

17 मार्च – 861

19 मार्च – 1175

20 मार्च – 920

21 मार्च – 864

22 मार्च – 792

23 मार्च – 902

24 मार्च- 939

 25 मार्च – 944

26 मार्च – 806

27 मार्च – 966

28 मार्च – 892

और 29 मार्च को 1061 मेगावाट बिजली उपलब्ध रही.

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गर्मी में थर्मल व पनबिजली प्लांट के लिये पानी भी चुनौती

गर्मी में थर्मल और पनबिजली प्लांट के लिये पानी भी चुनौती है. पानी की कमी के कारण सिकिदिरी हाइडल से उत्पादन पिछले दो माह से बंद है. टीवीएनएल की यूनिट फेल होने पर शुक्रवार को सिकिदिरी से बिजली उत्पादन हुआ.

इसके लिये जलसंसाधन विभाग से मंजूरी ली गई. गेतलसूद डैम में 1925 फीट तक पानी रहने पर ही बिजली उत्पादन की स्वीकृति है. विशेष परिस्थिति में जलसंसाधन विभाग से मंजूरी ली गई.

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