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क्या दो करोड़ में बनेगी स्मार्ट सिटी? शहरों को नहीं मिल रही राशि

आरटीआइ से खुलासा कई स्मार्ट शहरों को मिले महज दो से 50 करोड़ रुपये

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New Delhi: अगर आपसे कहा जाये कि दो करोड़ में किसी शहर को स्मार्ट सिटी बनाया जायेगा. तो आप शायद हैरान हो जाये. लेकिन शहरों को स्मार्ट बनाने की सरकार की योजना को लेकर दायर किये गये आरटीआइ से जो जानकारी सामने आयी है, उसमें कई शहरों को अबतक केवल दो करोड़ रुपये दिये गये.

जनसत्ता डॉट कॉम की खबर के अनुसार, पांच चरणों (जिसमें एक फास्ट ट्रैक राउंड) में स्मार्ट सिटी की घोषणा होने के बाद भी कई शहरों को अभी तक पूरा बजट नहीं मिल सका है.

कुछ शहरों को महज दो करोड़ से 50 करोड़ रुपए की राशि ही मिली हैं. जबकि शहरों को स्मार्ट करने की योजना को पूरा करने का समय 2019-20 तक का था.

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आरटीआइ से खुलासा

सूचना के अधिकार के तहत अभी तक चुने गए शहरों के बजट और उनमें हुए कार्यों की जानकारी मांगी गई थी. मिली जानकारी के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर के जम्मू और श्रीनगर को दो करोड़ की राशि पहले जारी की गई थी.

हालांकि दोनों शहरों का चुनाव चौथे चरण के तहत 2017 में हुआ था. उसके बाद 2017-18 और 2018-19 में 52 और 54 करोड़ रुपए ही जारी हुए.

मिली सूचना के मुताबिक, पांचवे चरण के तहत 2018 में चुने गए लक्ष्यद्वीप के कवरत्ती शहर को अबतक एक रुपया भी जारी नहीं हो सका है.

वहीं महाराष्ट्र के अमरावती को स्मार्ट सिटी के लिए चुने जाने से पहले 2015-16 में ही दो करोड़ रुपए जारी किए गए थे. लेकिन 2017 में चयन होने के बाद एक भी रुपए जारी नहीं किया गया है.

ऐसी ही स्थिति मेघालय के शिलांग की है, जिसका चयन चौथे चरण में 2018 में हुआ, लेकिन इससे पहले 2015-16 में दो करोड़ रुपए जारी किए गए थे. उसके बाद से इस शहर को बाकी की रकम नहीं दी गई है.

प्रस्ताव तैयार करने में खर्च करने थे दो करोड़

इस दौरान ये भी जानकारी मांगी गई थी कि स्मार्ट सिटी में चयन से पहले ही कई शहरों को दो-दो करोड़ रुपए की राशि दी गई थी, वह किस मद में खर्च करने के लिए थी.

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इसके जवाब में आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय की ओर से बताया गया है कि स्मार्ट सिटी मिशन के दिशानिर्देशों के अनुसार, फस्ट फेज में छंटनी किए गए सभी संभावित स्मार्ट शहरों को दो करोड़ रुपए प्रति शहर जारी किए गए हैं.

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हालांकि, राशि के मद के विषय में जानकारी तो मुहैया नहीं करायी गई, लेकिन नियमों के मुताबिक इन रुपयों को स्मार्ट सिटी में चयन के लिए प्रोजेक्ट बनाने में खर्च किया गया था.

क्योंकि उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद, रामपुर, मेरठ, रायबरेली, ग्रेटर मुंबई और तमिलनाडू का डिंडीगुल आदि कई शहर चयनित नहीं हो सके, लेकिन फिर भी यहां 2015-16 और 17-18 के बीच दो-दो करोड़ रुपए जारी किए गए थे. हालांकि कई शहर इसमें भी आधी रकम खर्च कर सके हैं.

शॉर्ट लिस्टेड फर्म चुनने का जिम्मा शहर का

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आरटीआइ के तहत स्मार्ट सिटी के प्रस्तावित प्रोजेक्ट बनाने के लिए मंत्रालय की ओर से शॉर्ट लिस्टेड किए गए परामर्शी फर्मों पर भी जानकारी मांगी गई थी. जिसके बारे में बताया गया कि इनका चुनाव शहरों की ओर से खुद किया गया था.

हालांकि इन फर्मों का चुनाव मंत्रालय की ओर से चयनित 48 फर्मों में से करना था. पांच चरणों के दौरान 27 शहरों को मात्र 50 करोड़ के आसपास ही रकम जारी की गई है.

आबंटित राशि से कम खर्च

पहले चरण में चयनित 20 शहरों में से 18 को अब तक 196-196 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं. इनमें असम में 196 करोड़ में 12.80 करोड़, नई दिल्ली में 196 करोड़ में 72.81 करोड़, कर्नाटक के बेलगावी में 15.41 करोड़ और दावनगेरे में 26.71 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं.

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केरल के कोच्चि में 5.38 करोड़ रुपए, महाराष्ट्र के सोलापुर में 32.30 और पुणे में 83.56, लुधियाना में 16.40, जयपुर में 65.98 और उदयपुर में 36.54 करोड़ रुपए ही खर्च किए गए हैं.

हालांकि, कुछ शहरों के निगमों का कहना है कि फरवरी के बाद चुनावी आचार संहिता लागू होने के कारण काम ठप हो गया था. हालांकि संसद में एक सवाल के जवाब में बताया गया है कि स्मार्ट सिटी की 5151 परियोजनाएं प्रस्तावित हैं, जिनमें 379 परियोजनाएं पूरी की गई हैं और 732 पर काम चल रहा है.

अभी तक शहरों को जारी की गई रकम

पहला चरण (2015-16)- 1467.2 करोड़ रु.
दूसरा चरण (2016-17)- 4492.5 करोड़ रु.
तीसरा चरण (2017-18)- 4585.5 करोड़ रु.
चौथा चरण (2018-19)- 2942 करोड़ रु.

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