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घर-गांव का चेहरा बदल रही हैं महिलाएं, पहचान ली है अपनी ताकत : सुदेश कुमार महतो

चक्रधरपुर में महिला सम्मेलन का आयोजन, उमड़ी भीड़, विधानसभा के बूथ प्रभारियों के साथ बनायी रणनीति, भरा जोश.

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Ranchi : आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष सुदेश कुमार महतो ने कहा है कि महिला समूहों ने अपनी ताकत की पहचान कर ली है. महिला समूहों के गठन से घर-गांव और समाज का चेहरा बदल रहा है. झारखंड में परिवर्तन की बड़ी संवाहक अब गांव की महिलाएं बनी हैं. उन्हें और ऊंचाई पर जाना है. इसके लिए एकजुटता के साथ मेहनत करनी होगी.

पार्टी सुप्रीमो चक्रधपुर विधानसभा क्षेत्र के पोड़ाहाट स्टेडियम में विशाल महिला सम्मेलन को संबोधित करते हुए ये बातें कही. इस सम्मेलन में पूरे विधानसभा से महिला समूहों की सदस्य जुटी थीं. आजसू पार्टी के बैनर तले आयोजित इस कार्यक्रम मे बड़ी संख्या में महिला पंचायत प्रतिनिधि भी शामिल हुईं.

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सरकार भी महिला समूहों को आगे बढ़ाने को प्रतिबद्ध

घर-गांव का चेहरा बदल रही हैं महिलाएं, पहचान ली है अपनी ताकत : सुदेश कुमार महतोमहतो ने कहा कि आजसू पार्टी महिला समूहों के गठन और इसके जरिये रचनात्मक कार्यों को बढ़ावा देने के लिए शुरू से हिमायती रही है. वे लगातार महिला समूहों के बीच जा रहे हैं. इससे खुद भी जान पा रहे हैं कि बदलाव किस मोड़ पर है और आगे क्या किया जा सकता है. उन्होंने इस बात पर संतोष प्रकट किया कि अब सरकार भी महिला समूहों को आगे बढ़ाने के लिए कई योजनाओं से जोड़ रही है और नयी जिम्मेदारियां भी दे रही है.

उन्होंने चक्रधरपुर की महिलाओं को बताया कि सिल्ली विधानसभा क्षेत्र में उन्होंने बीस साल पहले ही इसकी बुनियाद रखी थी. महिला समूहों के गठन से बुनियादी बदलाव आया है. महिलाओं का आत्म विश्वास बढ़ा है और आर्थिक-सामाजिक स्तर पर उनका मान बढ़ा है. महिला समूहों का ही असर है कि अब घर के बर्तन-बासन और जेवर-गहने गिरवी नहीं रखे जाते. महिलाएं एक साथ बैठती हैं, तो आगे बढ़ने की बात होती है.

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योजनाओं का लाभ उठाएं महिलाएं

घर-गांव का चेहरा बदल रही हैं महिलाएं, पहचान ली है अपनी ताकत : सुदेश कुमार महतोउन्होंने महिलाओं को सरकार की योजना का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया. कैसे रोजगार के अवसर बढ़ाये जा सकते हैं,  इसके आइडिया खुद निकालें. गांव-पंचायत से निकलकर अपने काम को बड़े स्तर पर ले जाने की कोशिश करें. इसके लिए पंचायत और प्रखंड स्तर पर संवाद कार्यक्रम करें. शुरुआती दौर में ये काम कठिन लग सकता है, लेकिन एक समय आयेगा जब सबकी जिम्मेदारी तय होती दिखेगी. आपस में पहचान बढ़ेगी और विचारों का आदान-प्रदान होगा.

उन्होंने कहा कि महिला सशक्तीकरण का दौर है. इसमें शामिल होने के लिए और जीविकोपार्जन के नये साधन जुटाने के लिए सिलाई, कढ़ाई, पत्तल, चूडियां बनाने के लिए स्वरोजगार का भी प्रशिक्षण लें. सरकार की योजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों का लाभ उठायें. पंचायत के प्रतिनिधि हों या सरकारी कर्मचारी-अधिकारी उनसे सीधी बात करें. समूह में जाएं. साथ ही गांवों के फैसले में भी अपनी समझादारी तथा भागीदारी दिखाएं.

सुदेश कुमार महतो ने कहा कि चक्रधरपुर की महिलाओं में राजनीतिक चेतना भी पहले से बढ़ी है. लिहाजा राजनीतिक मोर्चे पर भी अपनी ताकत दिखाएं.

संजीवनी का योगदान

चक्रधरपुर विधानसभा प्रभारी रामलाल मुंडा ने कहा कि परिवार का मतलब पुरुष नहीं होता है. सालों पहले सुदेश महतो जी ने कल्पना की थी कि विचारों में और हक-अधिकार में समानता हो. सिल्ली में महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए संजीवनी नाम से कार्यक्रम की शुरुआत की थी. धीरे-धीरे महिलाएं जुड़ती गयीं और एक वक्त आया जब वे सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री बने और संजीवनी नाम से सरकार की योजना भी मंजूर हुई. 2012 में भारत सरकार से स्वीकृति मिली.

नीतियां, नियत बताते हैं बूथ प्रभारी

इससे पहले चक्रधपुर विधानसभा क्षेत्र के बूथ प्रभारियों के सम्मेलन में सुदेश कुमार महतो शामिल हुए. निर्मल महतो कुरमी भवन, राखा आसनतलिया में आयोजित बूथ प्रभारियों के सम्मेलन में उन्होंने बूथ प्रभारियों की जिम्मेदारी की चर्चा की.

उन्होंने कहा कि पार्टी की नीति, नियत, नेता के बारे में लोगों को बताने के लिए बूथ प्रभारियों की भूमिका बेहद अहम होती है. सांगठनिक मजबूती और चुनावी मोर्चे पर सफलता के लिए एक साधारण कार्यकर्ता असाधारण भूमिका अदा कर सकता है. बूथ स्तरीय कार्यकर्ताओं में ही किसी पार्टी की जान होती है. बूथस्तरीय कार्यकर्ता ही असली लड़ाई लड़ते हैं. वे अंग्रिम पंक्ति पर लड़नेवाले बूथ के सिपाही हैं. एक बूथ प्रभारी पूरे प्रखंड और विधानसभा क्षेत्र में उदाहरण साबित हो सकता है. खुद में भी वह नेतृत्व करने की क्षमता बढ़ा सकता है. एक-एक वोटर तक उसकी पकड़ होनी चाहिए.

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